बचपन की अब वो यादों को मै ढूँढता हूँ,

मिलता ना अब वो अंदर जिसको मै ढूँढता हूँ।

गौरया को बाजरा चुगाना फिर से मैं चाहता हूँ,

जामुन के पेड़ पर बैठा तुमको ढूँढता हूँ।।

वो तितलियों को छूना फिर से चाहता हूँ,

मिलता ना अब वो मंज़र जिसको मै ढूँढता हूँ।।

थक कर हुए वीरान अब फुरसत मैं चाहता हूँ,

इन रास्तों को छोड़कर तुमको ढूँढता हूँ।

मिलना है तुमसे ज्यादा ऐसा मै चाहता हूँ,

बचपन की याद बन कर कंचे में ढूँढता हूँ।

धानों के उन बगीचों में फिर से, जीना चाहता हूँ,

चित्रधार के पन्नों में बचपन को ढूँढता हूँ।।

सुरज की पहली किरणों को फिर से मै देखता हूँ,

ओसों की ठण्डी बूँदों में तुमको ढूँढता हूँ।।

मिलते थे खलिहानों में फिर से मैं चाहता हूँ,

गन्ने की उस फसल में तुमको ढूँढता हूँ।

आमों के पेड़ो पर चढ़ना फिर से मैं चाहता हूँ,

सरसों के पीले रंगों में तुमको ढूँढता हूँ।।

मेढ़क को यूँ पकड़ना फिर से मैं चाहता हूँ,

जलाशय के उन किनारों पर तुमको ढूँढता हूँ।