विनय न समझे वो खल है
दुर्जन जो बोले वो छल है
करे नष्ट विचारों को
और ढूंढे नई पहेली को
सखि कहें बसंत है
उसका कहना कि है पतझड़
यही सुना और लिखा अचल
कपटी का अमृत ही छल है।।
#सत्येन्द्र तिवारी
7 months ago
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विनय न समझे वो खल है
दुर्जन जो बोले वो छल है
करे नष्ट विचारों को
और ढूंढे नई पहेली को
सखि कहें बसंत है
उसका कहना कि है पतझड़
यही सुना और लिखा अचल
कपटी का अमृत ही छल है।।
#सत्येन्द्र तिवारी
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जीवन में संघर्ष के साथ कर्मों को करते हुए जो अडिग रहता है एक दिन निश्चित ही उसके जीवन वास्तविक सफलता उसको मिलती है।
बह चलूँ साथ तेरे वही धार हूँ,
जिंदगी का कश्मकश एक ऐसा सफर है जिसमें खुशियों और दुखों का मेल होता है, जिसमें संघर्ष और सफलता दोनों का सामना करना पड़ता है.