रसायनशास्त्र में अम्ल (असिड) वह पदार्थ होता है जो जलीय घोल में घुलकर हाइड्रोजन आयन (H⁺) देता है, और क्षार (बेस) वह पदार्थ है जो जल में घुलकर हाइड्रॉक्साइड आयन (OH⁻) देता है। उदाहरण के लिए, हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl) पानी में घुलकर H⁺ और Cl⁻ में विखण्डित होता है, जबकि सोडियम हाइड्रॉक्साइड (NaOH) घुलने पर Na⁺ और OH⁻ देता है। इन अवधारणाओं की शुरुआत 1884 में स्वीडिश रसायनज्ञ स्वांटे आरेनियस द्वारा हुई, जिन्होंने आरेनियस सिद्धांत प्रस्तावित किया। बाद में 1923 में जोहान्स ब्रॉनस्टेड और थॉमस लॉरी ने ब्रॉनस्टेड-लॉरी सिद्धांत प्रस्तुत किया, जिसके अनुसार अम्ल प्रोटॉन (H⁺) दान करने वाला और क्षार प्रोटॉन ग्रहण करने वाला होता है। इसी वर्ष चार्ल्स लुईस ने लुईस सिद्धांत दिया, जिसमें अम्ल इलेक्ट्रॉन-युग्म स्वीकार करने वाला और क्षार इलेक्ट्रॉन-युग्म दान करने वाला प्रदार्थ माना गया। इस तरह आधुनिक अम्ल-क्षार अवधारणा Arrhenius, Bronsted-Lowry और Lewis सिद्धांतों द्वारा विस्तारित हुई । घोल की अम्लता–क्षारीयता नापने के लिए pH मापदंड 0–14 के पैमाने पर आधारित होता है, जहाँ pH = 7 तटस्थ होता है।

प्रमुख अम्ल-क्षार सिद्धांत

·         आरेनियस सिद्धांत: एक Arrhenius अम्ल वह यौगिक है जो जलीय विलयन में घुलकर H⁺ आयन उत्पन्न करता है, और एक Arrhenius क्षार वह यौगिक है जो जलीय घोल में घुलकर OH⁻ आयन पैदा करता है। उदाहरणतः HCl (जलीय) में H⁺ बनता है और NaOH (जलीय) में OH⁻। आरेनियस सिद्धांत मुख्यतः जलीय विलयन तक सीमित है।

·         ब्रॉनस्टेड-लॉरी सिद्धांत: इस सिद्धांत के अनुसार अम्ल वह पदार्थ है जो रासायनिक अभिक्रिया में प्रोटॉन (H⁺) दान करता है, और क्षार वह है जो प्रोटॉन स्वीकार करता है। उदाहरण के लिए, जब HCl घुलनशील अवस्था में पानी (H₂O) से अभिक्रिया करता है, तो HCl प्रोटॉन (H⁺) दान कर H₃O⁺ बनाता है और Cl⁻ रह जाता है। इसी प्रकार, क्षार अम्ल से प्रोटॉन ग्रहण कर क्रमशः अम्ल और क्षार के संयुग्म घटक बनाते हैं।

·         लुईस सिद्धांत: इस सिद्धांत में अम्ल और क्षार को इलेक्ट्रॉन-युग्म के संदर्भ में परिभाषित किया जाता है। लुईस अम्ल वह रासायनिक प्रजाति है जिसमें एक खाली आण्विक कक्षक (ऑर्बिटल) होता है जो किसी लुईस क्षार (Electron-pair donor) से एक इलेक्ट्रॉन युग्म स्वीकार कर एक डेटिव बंध बनाता है। उदाहरणतः BF₃ एक लुईस अम्ल है क्योंकि इसमें बाह्य कक्षक खाली है और यह इलेक्ट्रॉन युग्म स्वीकार कर सकता है। इसी प्रकार, लुईस क्षार वह प्रजाति है जिसका बाहरी कक्षक भरा होता है और वह अपना एक इलेक्ट्रॉन युग्म अम्ल को दान करके डेटिव बंध बनाता है।

उदाहरण एवं समीकरण

अम्ल-क्षार प्रतिक्रियाओं के कई उदाहरण द्रव्यमान और समीकरणों द्वारा समझाए जाते हैं। सामान्य तटस्थकरण अभिक्रिया का समीकरण इस प्रकार है:

अम्ल + क्षार → लवण + पानी

उदाहरण के लिए, हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl) का सोडियम हाइड्रॉक्साइड (NaOH) के साथ अभिक्रिया समीकरण है:

HCl + NaOH → NaCl + H₂O 

यहाँ उत्पाद रूप में सोडियम क्लोराइड (NaCl) लवण और पानी बनता है। इसी तरह सल्फ्यूरिक अम्ल (H₂SO₄) का द्वितीयक क्षार (जैसे Ca(OH)₂) से घुलनशील लवण व जल उत्पादन हो सकता है। अम्ल और क्षार की तीव्रता (मजबूती) इस बात से निर्धारित होती है कि वे पानी में कितनी पूरी तरह आयनित होते हैं। उदाहरणस्वरूप, HCl एक मजबूत अम्ल है जो पूर्णतः H⁺ में विभाजित हो जाता है। कमजोर अम्ल जैसे CH₃COOH (एसिटिक अम्ल) आंशिक रूप से ही H⁺ प्रदान करते हैं। इसी प्रकार NaOH एक मजबूत क्षार है और NH₃ एक कमजोर क्षार है। इन प्रतिक्रियाओं में pH परिवर्तन, आयन सांद्रता इत्यादि की व्यावहारिक गणना की जा सकती है।