तुम्हारी आदत जानी पहचानी है
तुम जो करते हो वो भी पुरानी है
साथ रहे या साथ दिए ये तो पता लगानी है
राम नाम जपने वाले , हर दम दम भरने वाले,
भौकाल तुम्हारी जानी है , पहले से तुमको पहचानी है
तुम अपने कुछ न करते हो , दूसरे के बात में दम भरते हो
कथनी करनी अलग तुम्हारी , सबको ये आभास है
बिल्ली के गर्दन में घंटी बंधेगा कौन बस यही प्रयास है
कोई तुमको न बोले तुम जीत अपनी समझते हो,
दूसरे के सामने इसी बात का चर्चा हमेशा तुम करते हो ,
एक गलती क्या मिली तुम्हे , तुमसे रास नही आया
तुमने क्या अपने मैत्री मोल को न पहचाना,
लो मैं आज सुनता हूं , तुमको ये बताता हूं
जब बात अपने पे आएगी , करनी बहुत सताएगी,
कोई साथ नही देगा जब , अक्ल ठिकाने आयेगी
कहे दिवेश सुनो सब भाई , सबसे रखो भाईचारा बनाई
कोई नही यहां रहने वाला , फिर काहे का अभिमान रे भाई।