- नमः शिवाभ्यां नवयौवनाभ्यां
परस्पराश्लिष्टवपुर्धराभ्याम् ।
नगेन्द्रकन्यावृषकेतनाभ्यां
नमो नमः शङ्करपार्वतीभ्याम् ॥
अर्थ – सदैव नवयौवन से युक्त, परस्पर आलिंगन किए एकरूप देहधारी, पर्वतराज हिमालय की पुत्री पार्वती और वृषभध्वज भगवान शंकर को बार-बार नमस्कार है।
- नमः शिवाभ्यां सरसोत्सवाभ्यां
नमस्कृताभीष्टवरप्रदाभ्याम् ।
नारायणेनार्चितपादुकाभ्यां
नमो नमः शङ्करपार्वतीभ्याम् ॥
अर्थ – जो भक्तों को इच्छित वर प्रदान करते हैं और जिनकी पादुकाओं की पूजा स्वयं भगवान नारायण ने की है, उन शिव-पार्वती को नमस्कार है।
- नमः शिवाभ्यां वृषवाहनाभ्यां
विरिञ्चिविष्ण्विन्द्रसुपूजिताभ्याम् ।
विभूतिपाटीरविलेपनाभ्यां
नमो नमः शङ्करपार्वतीभ्याम् ॥
अर्थ – जिनका वाहन नन्दी है, जिन्हें ब्रह्मा, विष्णु और इन्द्र भी पूजते हैं, जो भस्म और चन्दन से विभूषित हैं, उन शिव-पार्वती को नमस्कार है।
- नमः शिवाभ्यां जगदीश्वराभ्यां
जगत्सृष्टिस्थितिसंहृतिभ्याम् ।
जन्मादिदुःखक्षयकारणाभ्यां
नमो नमः शङ्करपार्वतीभ्याम् ॥
अर्थ – जो सृष्टि, पालन और संहार करने वाले हैं तथा जन्म आदि समस्त दुःखों का नाश करते हैं, उन जगदीश्वर शिव-पार्वती को नमस्कार है।
- नमः शिवाभ्यां मतिमार्गदाभ्यां
अशेषलोकैकहितैषिभ्याम् ।
करुणारसपूरितहृद्भ्याम्
नमो नमः शङ्करपार्वतीभ्याम् ॥
अर्थ – जो भक्तों को सद्बुद्धि और सही मार्ग प्रदान करते हैं तथा समस्त जगत के हित की कामना रखते हैं, उन करुणामय शिव-पार्वती को नमस्कार है।
- नमः शिवाभ्यां कलिनाशनाभ्यां
कैलासशैलस्थितदेवताभ्याम् ।
शशाङ्कचूडामणिशोभिताभ्यां
नमो नमः शङ्करपार्वतीभ्याम् ॥
अर्थ – जो कलियुग के दोषों का नाश करते हैं, कैलास पर्वत पर निवास करते हैं और जिनके मस्तक पर चन्द्रमा शोभायमान है, उन शिव-पार्वती को नमस्कार है।
- नमः शिवाभ्यां शरणागताभ्यां
भवाब्धितारिण्यनुकम्पिताभ्याम् ।
स्मृतिमात्रसंतुष्टचित्ताभ्यां
नमो नमः शङ्करपार्वतीभ्याम् ॥
अर्थ – जो शरणागतों की रक्षा करते हैं, संसार-सागर से पार लगाने वाले हैं और स्मरण मात्र से प्रसन्न हो जाते हैं, उन शिव-पार्वती को नमस्कार है।
- नमः शिवाभ्यां जटिलेश्वराभ्यां
जरामृत्युशोकविनाशनाभ्याम् ।
जनार्दनाद्यर्चितपादपद्माभ्यां
नमो नमः शङ्करपार्वतीभ्याम् ॥
अर्थ – जटाधारी महेश्वर और देवी पार्वती, जो जरा, मृत्यु और शोक का नाश करते हैं तथा जिनके चरणकमलों की पूजा देवगण करते हैं, उन्हें नमस्कार है।
- नमः शिवाभ्यां जगदेकमात्राभ्यां
सर्वप्रपञ्चैकनियन्त्रकाभ्याम् ।
अद्वैततत्त्वप्रतिपादकाभ्यां
नमो नमः शङ्करपार्वतीभ्याम् ॥
अर्थ – जो सम्पूर्ण जगत के एकमात्र नियन्ता और अद्वैत तत्त्व के प्रतिपादक हैं, उन शिव-पार्वती को नमस्कार है।
- नमः शिवाभ्यां त्रिभुवनाधिपाभ्यां
पूर्णेन्दुवदनप्रकाशिताभ्याम् ।
भुक्तिमुक्तिप्रददायकाभ्यां
नमो नमः शङ्करपार्वतीभ्याम् ॥
अर्थ – तीनों लोकों के अधिपति, पूर्ण चन्द्रमा के समान शोभायमान मुख वाले तथा भुक्ति-मुक्ति देने वाले शिव-पार्वती को नमस्कार है।
- नमः शिवाभ्यां परमेश्वराभ्यां
प्रणतार्तिहन्त्र्यनुग्रहाभ्याम् ।
पञ्चाक्षरीमन्त्ररूपिण्यभ्याम्
नमो नमः शङ्करपार्वतीभ्याम् ॥
अर्थ – जो परमेश्वर हैं, शरणागतों के दुःखों का नाश करते हैं और ‘नमः शिवाय’ पंचाक्षरी मंत्र के स्वरूप हैं, उन शिव-पार्वती को नमस्कार है।
- नमः शिवाभ्यां भवभीतिहारिण्यभ्याम्
संसाररोगौषधिरूपिण्यभ्याम् ।
अनन्तकल्याणगुणाकराभ्यां
नमो नमः शङ्करपार्वतीभ्याम् ॥
अर्थ – जो संसार रूपी भय और रोग का नाश करने वाले तथा अनन्त कल्याण गुणों के भंडार हैं, उन शिव-पार्वती को नमस्कार है।
- इदं स्तवं यः पठति श्रद्धया
भक्त्या समन्वितः सदा नरः ।
सौभाग्यमायुर्यशसमृद्धिम्
लभेत् स नित्यं शिवलोकमेति ॥
अर्थ – जो पुरुष श्रद्धा और भक्ति से इस स्तोत्र का पाठ करता है, वह सौभाग्य, आयु, यश और समृद्धि प्राप्त कर अंत में शिवलोक को प्राप्त होता है।
ॐ नमः पार्वती पतये हर हर महादेव ।
उमापति महादेव की जय ।