प्रस्तावनाः- इस योजना को 2016 में लागू किया गया इसके लागू होने के साथ संबंधित क्षेत्रों में NAIS.

और MNAIS (Modify National Agricultural insurances scheme) को हटा दिया गया है,

हालांकि weather based crop insurances scheme को स्वतन्त्र रूप से चलाया जा रहा है।

इस योजना में ऋणी और गैर ऋणी दोनों प्रकार के किसानों को साम्मिलित किया गया है। हालांकि

ऋणी किसानों के लिए यह अनिवार्य है। इस योजना का लाभ tenant formers and sharecroppers

तक भी विस्तृत किया गया है।

Need for crop insurance

भारत में किसानों की आर्थिक स्थिति काफी कमजोर है ऐसी स्थिति में उन्हें एक बेहतर सामाजिक सुरक्षा

की आवश्यकता है जो उन्हें  न केवल बाजार जोखिम बल्कि प्राकृतिक जोखिमों के प्रति पर्याप्त सुरक्षा दे सके।

यह ध्यान देने योग्य है कि भारत में डैच् केवल कीमत सुरक्षा प्रदान करती है तथा फसल में होने वाली हानियों

के प्रति कोई सुरक्षा नहीं देती है। इसके अलावा उसमें Horticulture भी सम्मिलित नहीं है इस प्रकार किसानों

को आय सुरक्षा (income security) नहीं मिल पाती है।

भारत में उपर्युक्त विश्लेषण के प्रकार में फसल बीमा के आवश्यकता को महसूस किया जा सकता है। फसल

बीमा में किसान की एक संभावित आय को बीमा कम्पनी द्वारा सुरक्षित कर दिया जाता है।