संक्षिप्त परिचय हर्मुज़ जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ने वाला प्रमुख जलमार्ग है। इसकी संकीर्णतम चौड़ाई लगभग 29 समुद्री मील (~54 किमी) है, जिसमें पूर्वागमन और प्रत्यागमन के लिए प्रत्येक दिशाओं में लगभग 3.7 किमी चौड़ी जलमार्ग संचालित होती है। यह विश्व अर्थव्यवस्था के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहाँ से रोज़ाना ~20 मिलियन बैरल कच्चा तेल निकलता है, जो विश्व की समुद्री तेल आपूर्ति का लगभग 25% है । हर्मुज़ के उत्तरी तट पर ईरान (बंदर अब्बास बंदरगाह सहित) स्थित है और दक्षिण में ओमान (मुसांदम प्रायद्वीप) और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई, फुजैरा आदि) हैं। इस जलडमरूमध्य में आठ प्रमुख द्वीप हैं, जिनमें से सात ईरान के नियंत्रण में हैं; अभू मूसा और लाडेज़ टुन्नब द्वीपों पर ईरान तथा यूएई के बीच विवाद है। नीचे दिए गए मानचित्र में हर्मुज़ जलडमरूमध्य का स्थान दर्शाया गया है: ऐतिहासिक पृष्ठभूमि 1514 में पुर्तगालियों ने होर्मुज़ द्वीप और जलमार्ग पर कब्ज़ा किया और किला बनाया। लगभग सैकड़ो साल तक पुर्तगाली नियंत्रण रहा, पर 1622 में अंग्रेज़-फ़ारसी गठबंधन ने इसे मुक्त कराया। 1798 से 1868 तक द्वीप की ओमान (मुस्कट) की सरकार को पट्टे पर दी गई। बाद में यह क्षेत्र ईरानी तांगेनर के अधीन रहा। 1980 के दशक में इराक-ईरान युद्ध के दौरान “टैंकर युद्ध” हुआ जिसमें दोनों देशों ने एक दूसरे के तेल टैंकरों और पश्चिमी शक्तियों के जहाज़ों पर हमले किए। इन संकटों में अमेरिका और यूरोपीय नौसेनाओं ने हर्मुज़ में जहाज़ों की सुरक्षा सुनिश्चित की। रणनीतिक महत्व हर्मुज़ जलडमरूमध्य वैश्विक तेल और गैस परिवहन के लिए सबसे महत्वपूर्ण गळ्यांतर मार्गों में से एक है। 2024 में यहाँ से प्रतिदिन औसतन 20 मिलियन बैरल कच्चा तेल निकला, जो विश्व की पेट्रोलियम तरल पदार्थ खपत का लगभग 20% था। IEA के अनुसार 2025 में करीब 25% समुद्री तेल व्यापार इसी मार्ग से हो रहा था। खाड़ी के देश (ईरान, कुवैत, कतर, बहरैन, इराक आदि) के अधिकांश तेल निर्यात इसी जलमार्ग से होते हैं; सऊदी अरब और यूएई पास वैकल्पिक पाइपलाइनों (उदा. पूर्व-पश्चिम पाइपलाइन से रेड सी) वाले होने के बावजूद इस मार्ग पर निर्भर हैं। लगभग 20% वैश्विक एलएनजी ( तरलीकृत प्राकृतिक गैस) भी यहीं से होकर जाती है। घरेलू रूप से, फारस की खाड़ी में संवेदनशील पारिस्थितिकी (कोरल रीफ, मैंग्रोव वनों, सैगरास बीड्स) हैं, जो बड़े तेल रिसाव से प्रभावित हो सकते हैं । 1980 के युद्ध में लाखों बैरल तेल बहाने से किमी भर तटीय क्षेत्रों को प्रदूषण हुआ था, और आज भी किसी बड़े रिसाव से क्षेत्र की मत्स्य-कृषि और पर्यटन अर्थव्यवस्था क्षतिग्रस्त हो सकती है। जैव विविधता के लिहाज से यहां अरबी हंपबैक व्हेल, डॉलफिन, कुछ कछुए प्रजातियाँ, हजारों मछलियाँ व अन्य समुद्री जीवन रहते हैं; तेज जहाज़ी आवाज़ और दुर्घटनाएं इनके लिए खतरा हैं। प्रमुख सुरक्षा घटनाएँ एवं विवाद हर्मुज़ के इतिहास में कई बार सैन्य तनाव और जहाज़ीय हमलों ने इस मार्ग को अस्थिर किया है। इराक-ईरान युद्ध में तेल टैंकरों पर हमलों (टैंकर युद्ध) के बाद भी यह बंद नहीं हुआ। 2019 में खाड़ी क्षेत्र में तनाव चरम पर था: मई-जून 2019 में चार तेल टैंकरों पर विस्फोट/आग लगी और विशेष रूप से दो टैंकरों (कोकुका करेजियस और फ्रंट ऑल्टियर) को लक्षित किया गया। इसके कुछ ही हफ्ते बाद (19 जुलाई 2019) ईरान की रिवॉल्यूशनरी गार्ड ने ब्रिटिश-स्वीडिश तटीय टैंकर Stena Impero को जब्त किया, जबकि पिछले महीने ब्रिटिश रॉयल मरिनस ने स्पेन के गिब्राल्टर में एक ईरानी सुपरटैंकर Grace 1 पर नियंत्रण किया था । इसी दौरान ईरानी अधिकारियों ने अमेरिका और उसके सहयोगियों को क्षेत्र में ‘दुश्मन’ बताकर पानी में खतरों की चेतावनी दी। मार्च 2026 में अमेरिकी-इजरायली हमलों के जवाब में इरान ने घोषणा की कि अमेरिका व उसके सहयोगी को छोड़कर कोई जहाज़ मार्ग से गुजरने में बाधित नहीं होंगे। परंतु इस संघर्ष के कारण मरच 2026 में हर्मुज़ के माध्यम से जहाज़ी आवागमन 97% तक गिर गया, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति में अभूतपूर्व व्यवधान आया। वर्तमान कानूनी स्थिति एवं शासन अंतरराष्ट्रीय कानून के अंतर्गत हर्मुज़ जलडमरूमध्य को एक “अंतर्राष्ट्रीय जलसड़क” माना जाता है। संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून सम्मेलन (UNCLOS) के अनुच्छेद 37 के तहत इसमें पारगमन पारगमन (transit passage) का अधिकार सभी जहाजों और विमानों को उपलब्ध है । इसका अर्थ है कि युद्धकाल में भी कोई देश अवरोध नहीं कर सकता; सभी जहाजों को बिना विलंब अपने सामान्य संचालन में जलडमरूमध्य पार करने का हक़ है। यद्यपि ईरान और अमेरिका सहित कुछ प्रमुख देश UNCLOS के पक्ष नहीं हैं, फिर भी पारगमन का यह सिद्धांत प्रथा कानून के रूप में मान्यता प्राप्त है और सभी राष्ट्रों के लिए बाध्यकारी है। शासन व्यवस्था के रूप में क्षेत्रीय सहयोग और नौसैन्य गश्त होती रहती है: भारत, अमेरिका, ब्रिटेन और अन्य मित्र देशों ने नौसेनाएँ भेजी हैं ताकि जहाजों की सुरक्षा बनी रहे। संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय निकाय समय-समय पर मार्ग की खुली आवाजाही पर बल देते रहे हैं। आर्थिक और पर्यावरणीय प्रभाव इस जलमार्ग की स्थिरता से सीधे वैश्विक ऊर्जा बाजार प्रभावित होते हैं। फारस की खाड़ी के देशों के निर्यात 20% विश्व तेल पारगमन का हिस्सा हैं, और 80% तेल एशियाई बाजारों (विशेषकर चीन, भारत, जापान, कोरिया) की ओर जाता है । इससे तेल की कीमतें कम लोचशील होती हैं। पारगमन में व्यवधान से तत्काल तेल मूल्य वृद्धि होती है। पर्यावरण की दृष्टि से भी अत्यधिक जोखिम है: भारी तेल रिसाव क्षेत्र के संवेदनशील पारिस्थितिक तंत्र (कोरल रीफ, मैंग्रोव वगैरह) को दीर्घकाल तक प्रभावित कर सकते हैं । बड़े जहाज़ दुर्घटना की स्थिति में उत्पादन तटबंधों और जलशोधन संयंत्रों को भी संकट में डाल सकती है। युद्ध या अराजकता में तेल टैंकरों पर हमले और समुद्री खानों के खतरे से भारी प्रदूषण हो सकता है । इन जोखिमों के मद्देनज़र भारत, पश्चिम एशियाई और अन्य देश अपने स्वदेशी ऊर्जा भंडारण बढ़ा रहे हैं तथा जहाज़ी रास्तों की सुरक्षा के लिए रक्षा तैयारियों को बढ़ावा दे रहे हैं। प्रमुख अवसंरचना हर्मुज़ क्षेत्र के प्रमुख बंदरगाह और तट संरचनाओं में ईरानी अब्बास बंदरगाह और ओमान का खासाब बंदरगाह शामिल हैं। यूएई में फुजैरा बंदरगाह फारस की खाड़ी नहीं होने पर भी तेल परिवहन की बड़ी कड़ी है। यूएई और सऊदी अरब दोनों ने पारगमन का निर्बाध रख-रखाव सुनिश्चित करने हेतु अतिरिक्त पाइपलाइन नेटवर्क विकसित किया है: सऊदी का पूर्व-पश्चिम तेल पाइपलाइन (जेद्दाह तक) लगभग 5 मिलियन बैरल/दिन क्षमता का है जिसे हाल ही में 7 मिलियन तक बढ़ाया गया। इसी तरह यूएई का फुजैरा पाइपलाइन ~1.8 मिलियन बैरल/दिन ले जाता है। इस पाइपलाइन नेटवर्क से हर्मुज़ मार्ग बंद होने पर भी खाड़ी का तेल लाल सागर/रड सी तथा भारतीय महासागर के मार्गों से विश्व बाजार तक पहुँच सकता है। (जैसे कि इंडिया-ओमान द्विपक्षीय प्रतिबद्धता के अंतर्गत दुकोम बंदरगाह का विकास नई संभावना देता है।) क्षेत्र में अमेरिकी नौसेना की 5वीं फ्लीट (बहरीन) का मुख्यालय, ब्रिटिश नौसेना अड्डे, भारतीय जहाज़रानी साझेदारियाँ (उदा. दुकोम में सहयोगी सुविधाएं), और चीनी सुविधा (दुबई के खलीफा बंदरगाह पर) जैसी कई सुरक्षा आधार भी हैं। वैकल्पिक मार्ग तुलना मार्ग अनुमानित दूरी/समय अनुमानित लागत क्षमता (बैरल/दिन) होर्मुज़ जलमार्ग (वर्तमान) फारस की खाड़ी से सीधे (सबसे छोटा) सबसे कम (अप्रत्यक्ष खर्च) लगभग समस्त (20 एमएमबी) सऊदी पूर्व-पश्चिम पाइपलाइन + सूएज़ ~500 किमी पाइपलाइन + रेड़ सी/मेडिटेरियन मार्ग (~20–25 दिन) पाइपलाइन निर्माण एवं शुल्क ~5–7 एमएमबी यूएई फुजैरा पाइपलाइन + महासागर ~400 किमी पाइपलाइन + ओमान-भारत समुद्री मार्ग (~2–3 दिन) पाइपलाइन एवं सीमित शिपिंग ~1.8 एमएमबी दक्षिण अफ्रीका (केप रूट) ~14,000 समुद्री मील (~35–40 दिन) बहुत अधिक (ईंधन व समय) असीमित (जहाज़ों की उपलब्धि तक)