भारत तू है कर्म विधाता, 

तुझमें सिंधी और मराठा।


उज्जवल दीप समर्पित तुझको, 

विंध्य हिमांचल अर्पित तुझको ।


शीर्ष हिमालय मुकुट है सिर पर, 

चरण पादुका धोता सागर ।


भारत तू है भाग्य विधाता, 

तुझसे हिन्दी की है गाथा।


मंगल दीप जलाऊँ तुझमें, 

राग भैरवी गाऊँ तुझमे ।


तमिल तेलगू कन्नड तुझमे, 

तू ही बोड़ो उर्दू तुझमें। 

तू अखण्ड है समाजवादी, 

जन गण को देते आज़ादी।


गंगा यमुना बहती धारा,

उत्कल बंग भी हमको प्यारा।


भारत तू है भाग्य विधाता,

तुझमें ये सब धर्म समाता ।।