वह अपने आपे में नहीं है, वह अपने सिल्क की साड़ी को अपने शरीर से नोच कर फेंक रही है, वह अपने शरीर पर कोई भी वस्त्र नहीं चाहती। वह जोर जोर से चिल्ला रही है स्वयं को नुकसान पहुंचा रही है। जो भी उसके नज़दीक जा रहा है उसे कसकर धक्का दे रहे है। उसका शरीर अत्यधिक ज्वर से पीड़ित मालूम हो रहा है।

क्या हुआ है पंडिताइन को? , रुदल ने मितान से पूछा।

रात को बुखार था , परासिटामोल दिया लेकिन आराम नही हुआ, मितान ने कहा।

रविन्द्र कह रहे हैं कि मस्तिष्क बुखार है ।

तुरंत ले चलो तनिक भी देर मत करो, दीना ने मितान के बेटे से कहा।  

मितान का बड़ा बेटा बिना एक भी क्षण गंवाए दौड़ता हुआ सड़क किनारे से गुजर रहे ऑटो रिक्शा को रोकते हुए चालक से सरकारी अस्पताल चलने के लिए कहा।

30 रुपए लगेंगे, ऑटो वाला बोला ।

ठीक है चलिए , लड़के ने कहा।

ऑटो को अपनी ओर आता देख तेजी से दीना मितान की ओर बढ़ते हुए उठने को कहा जो अपनी पत्नी के असामान्य शारीरिक लक्षणों को रोकने का असफल प्रयास कर रहा था।    ...............................................................continue